मौत के इंतजार में छिदामी


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एंकर—आर्थिक तंगी की हालत के चलते अजीब तरह की बीमारी से जूझ रहा शख्स , मेडिकल साइंस के लिए बिमारी है चुनोती——छपारा/चमारी- अपने पेठ में हजारो लौहे की पिन लिए एक गरीब हर दिन मौत के इंतज़ार में वक्त गुजार रहा है ।उक्त शख्स को पल पल तड़पते देख परिवार भी सदमे में है जिसे भी उक्त शख्स की बिमारी का पता चलता वह यही कहकर अपना पल्ला झाड़ लेता है की यह तो मेडिकल साइंस के लिए भी चुनोती है छपारा विकास खण्ड के अंतर्गत चमारी गाव आता है जहाँ 55 वर्षीय छिदामी कुशवाहा बिस्तर पर पड़ा है जो पल पल मौत का इंतज़ार कर रहा है ।छिदामी के परिजनों की माने तो लगभग 1 वर्ष पूर्व उसके पेट में अचानक तेज दर्द हुआ और उसकी पेशाब भी रुक गई। जिसे गांव के ही एक डॉक्टर को दिखाया गया लेकिन उसे कुछ समझ नहीं आया जिसके बाद उसे आनन-फानन में समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र छपारा ले जाया गया गया था। जहां से जिला चिकित्सालय रेफर कर दिया गया। जिसकी तकलीफ को जिला चिकित्सालय के डॉक्टरों को भी समझ नहीं आया। और उन्होंने उसे मेडिकल अस्पताल जबलपुर रिफर किया गया। जहां डॉक्टरों ने छिदामी कुशवाहा का एक्सरे किया और एक्सरा रिपोर्ट देखकर वह दंग रह गए बताया जाता है की एक्सरा रिपोर्ट में।पता चला की छिदामी के पेट में लोहे के खीले , सुई दिखाई दे रही है जिसके बाद बमुश्किल एक खीला निकाला गया जिसके बाद थोड़ी राहत मिली और यूरिन होने लगी. डॉक्टरों ने पेट में इतनी भारी संख्या में नुकीले खिले देखकर हाथ खड़े कर दिए और कहा की ओपरेशन के जरिये उक्त पिंनो या खिलो को निकाल पाना हमारे बस की बात नहीं है। छिदामी के परिवार से उनके घर पहुंचकर हमारे संवाददाता ने हकीकत जानी है जिसमें हैरान कर देने वाली बात सामने आई सबसे मुख्य बंसल न्यूज़ टीम ने जब परिजनों से पूछा कि आखिर यह नुकीले खिले पेट में कैसे गए ? कही छिदामी को।लोहे के खीले खाने की आदत तो नहीं थी तब छिदामी ने स्वयं ही हमारे संवाददाता से चर्चा करते हुए बताया कि वह खुद हैरान हैं । ऑपरेशन के बाद उनको पता लगा कि पेट के अंदर इस तरह के नुकीले खेलें या पिन आ गए। मायूस होकर लौटे घर—– बताया जाता है की छिदामी को अजीब बिमारी के बाद जब इलाज नहीं मिला तो परिजन उसे वापिस गाव लेकर आ गए ।जहाँ कई दिनों से अपने पेट में हजारो पिन लिए छिदामी मौत का इंतज़ार कर रहा है ।
बहनो की।परवरिश के लिए नहीं किया विवाह——- बताया जाता है की पीड़ित छिदामी कुशवाहा के परिवार में तीन बहने हैं जो उम्र दराज हो चुकी हैं जिसमें से एक बहन मानसिक रूप से विकलांग अवस्था में है. इन तीनों बहनों के पालन पोषण करने की जिम्मेदारी भी छिदामी की ही थी इन बहनों के पालन पोषण की जिम्मेदारी उठाने वाले छिदामी ने अपना विवाह भी नहीं किया ।वह . मजदूरी कर अपने परिवार का भरण पोषण कर रहा था लेकिन 1 साल पूर्व अजीब तरह की बीमारी ने घेर लिया तब से ही छिदामी बिस्तर में ही पड़ा रहता है. जो तीन बहनों का सहारा बना हुआ था। । छिदामी की बहन रेवती बाई ने बताया कि उन्हें इलाज के लिए क्षेत्रीय विधायक दिनेश राय मुनमुन ने सिवनी बुलवाया था। बेहतर इलाज के लिए बाहर पहुंचाया जाने के लिए आश्वासन दिया गया था लेकिन बाद में उन्हें मदद नहीं मिली जिससे मायूस होकर वह अपने भाई को गांव में ही रखे हुए है। उन्होंने बताया कि इलाज के चक्कर में थोड़ी बहुत जो जमीन थी उसे भी गिरवी रख दिया लेकिन इलाज पूरा नहीं हो पाया.। आर्थिक तंगी के चलते छिदामी अपनी बड़ी बहन के घर में ही जिंदगी के लम्हे बिता रहा है उसके शरीर में इतनी भी ताकत नहीं बची की बिस्तर से उठ बैठ सके बड़ी मुश्किल से उसे उसकी बहन उठाती बैठाती है और वह दैनिक क्रियाएं कराती है. । पीड़ित के परिजनों को यह विश्वास है की हमेशा से गरीबो और बेसहारा की मदद करने के लिए मुनमुन राय आगे रहते है वह उनकी भी मदद करेंगे लेकिन कब इस बात का इंतज़ार है।। मेडिकल साइंस के लिए है चुनोती—— चमारी निवासी छिदामी को हुई अजीबो गरीब बिमारी मेडिकल साइंस के लिए भी चुनोती है यदि जबलपुर मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर चाहते तो इस चुनोती को स्वीकार करते हुए उसका इलाज करते या अन्य बड़े अस्पताल के डॉक्टर को जानकारी देते हो सकता है इस मामले को विदेश के डॉक्टर भी चुनोती मानकर गरीब का इलाज कर देते क्योकि आज भी कई एन जी ओ और कुछ ऐसे डॉक्टर भी मौजूद है जो इस तरह के लोगो की मदद के लिए हाथ बढ़ाते है। कोई सरकारी मदद नहीं मिल पाई है

वाहिद खान
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