हमीद काज़ी ने वापस कर दी टिकिट


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काटनवाला या सुरेन्द्र सिंह ठाकुर की प्रबल दावेदारी …..
हरदा । बुरहानपुर से कांग्रेस के घोषित उम्मीदवार हमीद काज़ी ने वक्फ मामलों के चलते अततः अपनी टिकट लौटा दी है ।सराहनीय निर्णय…..
मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी व्दारा विधानसभा चुनाव मे भोपाल उत्तर सहित बुरहानपुर से अल्पसंख्यक वर्ग को कोटे के तहत टिकिट देकर कांग्रेस ने इतीश्री जरूर कर ली थी परन्तु बुरहानपुर से कमजोर उम्मीदवार उतार कर भाजपा को विजय का आशीर्वाद दे दिया था।बुरहानपुर के पूर्व विधायक हमीद काज़ी की उम्मीदवारी निश्चित ही एकतरफा चुनाव का संकेत दे रहा था ।बुरहानपुर विधानसभा क्षेत्र से सलीम काटनवाला सशक्त दावेदार थे परन्तु गुटीय राजनीति का शिकार हो गये । बुरहानपुर मे हमेशा अर्जुन सिंह गुट हावी रहा है यदि सलीम काटनवाला को टिकिट मिल जाता तो शायद यादव गुट की राजनीति खतरे मे पड़ जाती इसी उद्देश्य के चलते बुरहानपुर से कमजोर उम्मीदवार मैदान मे उतारा गया है , अर्जुन सिंह के पुत्र नेता प्रतिपक्ष अजयसिंह ने पिता के निधन पश्चात कभी इस और ध्यान नहीं दिया जिसके चलते यहां यादव गुट सक्रिय जरूर हुआ परन्तु कभी कामयाब नहीं हो सका । हमीद काज़ी की उम्मीदवारी कांग्रेस के लिए नुकसान दायक सिद्ध हुई जिस तरिके से अल्पसंख्यक वर्ग के नाम पर टिकिट वितरण किया गया उससे ऐसा प्रतीत होता है कि कांग्रेस अब अल्पसंख्यकों के लिए गंभीर नहीं रही विधानसभा मे उनकी पुख्ता नुमाइंदी के लिए योग्य उम्मीदवार को पिछे करना यही संकेत दे रहा है देखना है हमीद काजी ने पहल कर टिकिट आलाकमान को वापस कर दिया है आलाकमान अल्पसंख्यक चेहरे के रूप मे सलीम काटनवाला को टिकिट दे सकता है अथवा कांग्रेस नेता सुरेन्द्र सिंह ठाकुर उम्मीदवार के रूप मे अपनी उपस्थिति दर्ज कराते है ? बुरहानपुर विधानसभा
कांग्रेस ने साधे जातीय समीकरण
बुरहानपुर से एक बार के विधायक हमीद काजी राकंपा से एक बार विधायक रहे। इससे पहले एक और बाद में एक चुनाव हारे। काजी.. शिक्षा – बीए, एलएलबी तक शिक्षित है
राजनीितक अनुभव – राकंपा से एक बार विधायक रहे। इससे पहले एक और बाद में एक चुनाव हारे। काजी को दिग्विजय सिंह और अरुण यादव, सुमित्रा को अरुण यादव ने दी सबसे पहले टिकट फाइनल होने की सूचना 
ऐसा कर कांग्रेस ने सीधे जातीय समीकरण साधे हैं। हमीद काजी अल्पसंख्यक समुदाय से हैं। बुरहानपुर विधानसभा में 1.10 लाख अल्पसंख्यक मतदाता हैं। हमीद काजी पहले विधायक रह चुके हैं। काजी पहले विधायक रह चुके हैं,
हमीद काजी 1998 में कांग्रेस से चुनाव लड़े लेकिन निर्दलीय ठाकुर शिवकुमार सिंह से चार हजार वोटों से हार गए। काजी को 41 हजार और शिवकुमार सिंह को 45 हजार वोट मिले थे। इसके बाद वे राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए। इसमें 2003 से 2008 तक प्रदेशाध्यक्ष रहे। 2003 में राकांपा से विधानसभा चुनाव लड़े। 4213 वोटों से जीते। उन्हें 41586 वोट मिले और भाजपा के कैलाश पारीख को 37373 वोट मिले। 2008 में राकांपा से फिर चुनाव में उतरे। भाजपा की अर्चना चिटनीस से 32854 वोटों से हारे। काजी को 52508 और चिटनीस को 81362 वोट मिले थे। इसके बाद उनकी कांग्रेस में वापसी हुई। 2015 से 2018 तक प्रदेश महामंत्री रहे। 5 दिन पहले उन्हें प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया। 
*समीक्षा – मुईन अख्तर खान**