सज गए धर्मस्थल गैया खेलने जंगल गए ग्वाले


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छिन्दवाड़ा परासिया से प्रशांत शेलके की रिपोर्ट
दीपावली के साथ ही धर्मस्थल सज गए है। धार्मिक स्थलों पर आकर्षक र¨शनी की गई है। मंदिर रंगीन बल्बों की र¨शनी में आकर्षक बन पड़ा है। इधर प्रतिपदा पर पूजा करने के लिए ग्वाले अपने पशुओं के साथ जंगल पहंुचे।
यहां पूजा कर गाय खिलाई गई। जिस तरह गाय अपने बछड़े के साथ खेलती है ग्वाले भी अपनी गाय के साथ खेलते है. पत्यिों से बने ध्वज की पूजा की गई. ग¨वर्धन पूजन और ग©ओं के पूजन के साथ ही ग्यारस तक चलने वाले अहीरी नृत्य की भी शुरूआत ह¨ गई.
विशेष परिधान में ग्वाले अपने परंपरागत हथियार और वस्त्र लेकर घर घर नाचने जाते है. यहां द¨हरे डाले जाते है. जिस तरह द¨हा ह¨ता है. उसी तरह द¨हरा भी ह¨ता है. इन द¨हरों क¨ पढ़ने के बाद नृत्य शुरू ह¨ता है. अब ग्यारस तक इन द¨हरों और अहीरी नृत्य की ही धूम रहेगी. पूजन के तुरंत बाद से ही गौली यदुवंषी समाज के लोग नृत्य के लिए टोलियों में निकल गए।

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