मेडिकल कालेज में शिशुओं के जन्म से खराब ह्रदय वाल्व को वी ए वी तकनीक से किया दुरस्त

इनपुट तपन शर्मा 

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के जवाहर लाल नेहरू मेडीकल कॉलेज के पीसीई-सीएस यूनिट ने शिशुओं के हृदय रोग की चिकित्सा में बेलून एवरोटिक वोल्वो प्लास्टि (बीएवी) आरंभ करके एक नया मील का पत्थर स्थापित किया है। बीएवी एक जटिल चिकित्सीय तकनीक है जो जन्म से ही हृदय के खराब वाल्व को सही करने के लिये कैथ लेब में अंजाम दी जाती है।बच्चों के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. मिर्जा मोहम्मद कामरान ने बताया कि हृदय के खराब वाल्व को कैथ लेब में विशेष बेलून की सहायता से आधुनिक तकनीक का प्रयोग करके खोला जाता है। इसका सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि चन्द सेकेण्डों के लिये हृदय को पेसमेकर के आधीन रखा जाता है तथा फिर बेलनू को वाल्व के अन्दर फुला कर वाल्व को खोला जाता है।उपरोक्त कार्य को अमुवि के जवाहर लाल नेहरू मेडीकल कॉलेज के डॉक्टर शाद अबकरी तथा डॉक्टर मिर्जा मोहम्मद कामरान ने अपने दल के साथ मिलकर सफलता के साथ अभी तक तीन शिशुओं पर प्रयोग किया है।दल में डॉक्टर शमीम गोहर (कार्डिक एनेस्थीसिया) डॉक्टर शहजाद (आईसीयू एक्सपर्ट) तथा कैथ लेब के स्टॉफ सदस्य आरफा, नाहीद, देवेन्द्र तथा आरिफ शामिल थे।संयोजक प्रोफेसर तबस्सुम शहाब ने इस सफलता के लिये चिकित्सकों के दल को बधाई देते हुए कहा कि जवाहर लाल नेहरू मेडीकल कॉलेज में उक्त चिकित्सा की सुविधा उपलब्ध होने से अब लोगों को बड़े शहरों में नहीं जाना पड़ेगा।

अलीगढ़ ब्यूरो 

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