बहराइच जनपद स्तरीय अनुश्रवण मूल्यांकन एवं समीक्षा समिति की बैठक सम्पन्न


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अस्थाई गौवंश आश्रय स्थल की स्थापना पर हुई चर्चाफखरपुर काज़ी हाउस का डीएम ने किया निरीक्षण

बहराइच  शासन के निर्देशानुसार जनपद के समस्त ग्रामीण व शहरी (यथा ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत, जिला पंचायत, नगर पालिका व नगर पंचायत) में अस्थाई गौवंश आश्रय स्थल की स्थापना व संचालन के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जनपद स्तरीय अनुश्रवण मूल्यांकन एवं समीक्षा समिति का गठन कर दिया गया है। जिसके सदस्य सचिव मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, बहराइच होंगे। जबकि पुलिस अधीक्षक, मुख्य विकास अधिकारी, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका, परियोजना निदेशक डीआरडीए, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत, समस्त उप जिलाधिकारी, अधि.अभि. सिंचाई व लघु सिंचाई, प्रभागीय वनाधिकारी (सामाजिक वानिकी), जिला पंचायत राज अधिकारी, जिला ग्रामोद्योग अधिकारी, जिला कृषि अधिकारी, जिला उद्यान अधिकारी व डीडीएम नाबार्ड सदस्य होंगे। कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी माला श्रीवास्तव की अध्यक्षता में आयोजित जनपद स्तरीय अनुश्रवण मूल्यांकन एवं समीक्षा समिति की प्रथम बैठक में जनपद में अस्थाई गौवंश आश्रय स्थल हेतु भूमि का चिन्हाॅकन व भूमि उपलब्ध कराने, अवस्थापना सृजन, अस्थाई गौवंश आश्रय स्थलों पर अन्य सेवाएं उपलब्ध कराने हेतु विभिन्न विभागों/समितियों के कर्तव्य एवं दायित्व पर चर्चा की गयी। बैठक के दौरान जिला उद्यान अधिकारी, खादी ग्रामोद्योग अधिकारी तथा सहायक अभियन्ता लघु सिंचाई की अनुपस्थित का कड़ा संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी ने सभी अनुपस्थित अधिकारियों का वेतन बाधित करने तथा स्पष्टीकरण प्राप्त किये जाने का निेर्दश दिया। बैठक के दौरान समिति के सदस्य सचिव मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. बलवन्त सिंह ने बताया कि जनपद स्तरीय समिति की भांति तहसील स्तर पर उप जिलाधिकारियों तथा विकास खण्ड स्तर पर खण्ड विकास अधिकारियों की अध्यक्षता में ब्लाक स्तरीय अनुश्रवण मूल्यांकन एवं समीक्षा समिति का गठन किया गया है। डा. सिंह ने बताया कि तहसील स्तरीय समिति में उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी तथा ब्लाक स्तरीय समिति में ग्राम पंचायत अधिकारी को सदस्य सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गयी है।  शासन द्वारा प्राख्यापित नीति की जानकारी देते हुए जिलाधिकारी ने बताया कि प्रदेश के नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में नगर निकाय/स्थानीय निकाय क्षेत्रों में काॅज़ी हाउस का पुनर्जीवीकरण कराया जाये। तथा गायों का दूध निकाल कर उन्हें एवं उनके गौवत्स को छोड़ने वाले कृषकों/पशुपालकों का चिन्हाॅकन ग्राम स्तरीय विभागीय कार्मिकों (यथा-राजस्व विभाग के लेखपाल, पुलिस विभाग के चैकीदार, ग्राम विकास के ग्राम विकास अधिकारी, पंचायती राज विभाग के ग्राम पंचायत अधिकारी) के माध्यम से किया जाये। इस सम्बन्ध में दी गयी व्यवस्था के तहत ऐसे पशुपालकों/कृषकों के अपने पालतू पशु सड़कों व सार्वजनिक स्थलों तथा अन्य व्यक्तियों की निजी भूमि पर संचरण हेतु छोड़ा जाता है तो इस दृष्टिकोण से स्थानीय पुलिस प्रशासन/जिला प्रशासन तथा नगर प्रशासन द्वारा उचित आर्थिक दण्डरोपण की कार्यवाही सुसंगत अधिनियम के अन्तर्गत की जायेगी। बैठक के दौरान सर्वसम्म्मति से निर्णय लिया गया कि निराश्रित एवं बेसहारा गौवंशों के चिन्हीकरण के लिए ग्राम स्तर पर कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों की टास्कफोर्स का गठन किया जाय। इनके द्वारा चिन्हित गौवंश को टैग भी किया जायेगा तथा इनका ग्राम पंचायत स्तर पर अभिलेखीकरण भी किया जायेगा। बैठक के दौरान अधि.अधि. नगर पंचायत रिसिया व नगर पालिका परिषद नानपारा को निर्देश दिया गया कि तत्काल निराश्रित गौवंशों को कान्हा आश्रय स्थल में शिफ्ट किया जाय। इसी सन्दर्भ में नगर पालिका परिषद बहराइच व नगर पंचायत जरवल के अधिशासी अधिकारियों को निर्देश दिये गये कि काज़ी हाउस की आवश्यक मरम्मत कराते हुए तत्काल संचालन सुनिश्चित करायें। बैठक के दौरान अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत ने बताया कि पूरे जनपद में जिला पंचायत की 18 काज़ी हाउस हैं। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि सभी काज़ी हाउसों को तत्काल संचालित कराना सुनिश्चित करें। बैठक में समिति के सदस्यों को यह भी निर्देश दिया गया कि शासन द्वारा सौंपे गये कर्तव्य एवं दायित्वों का निर्वहन पूरी मुस्तैदी के साथ करते हुए कृषक/पशुपालकों को इस बात के लिए प्रेरित किया जाय कि वे इस प्रकार का कार्य न करें जिससे कि समाज को किसी प्रकार की कठिनाई हो। बैठक के पश्चात जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी राहुल पाण्डेय, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत प्रदीप कुमार गुप्ता के साथ फखरपुर स्थित जिला पंचायत द्वारा संचालित काज़ी हाउस का स्थलीय निरीक्षण कर विभिन्न व्यवस्थाओं का जायज़ा लेते हुए निर्देशित किया कि तत्काल अस्थाई व्यवस्था करके गौवंशों को यहाॅ पर सुरक्षित रखने की व्यवस्था की जाय। उन्होंने अपर मुख्य अधिकारी को निर्देश दिया कि काज़ी हाउस को इस सुव्यवस्थित ढंग से संचालित करें कि सड़कों पर कोई भी छुट्टा जानवर दिखायी न दे।   


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