बहराइच धर्म की स्थापना के लिए अवतार ग्रहण करते हैं भगवान


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नानपारा बहराइच भागवत जी के वर्णन है कि भगवान के 24 अवतार हुए हैं जिसमें 14 अंश अवतार और 10 पारदर्शी अवतार हुए अवतार शब्द का अर्थ है भक्तों की रक्षा के लिए उतरना यानी भगवान मानव समाज को धर्म सिखाने के लिए इस धरा धाम पर अवतार ग्रहण करते हैं जब कंस का अत्याचार पृथ्वी पर बढ़ रहा था पृथ्वी पाप के कारण कहर लगी तब भगवान श्री कृष्ण अपनी सोलह कलाओं से युक्त होकर धरा धाम पर आए गीता जी में भगवान के आने के तीन प्रयोजन बताएं पहला सज्जन पुरुष की रक्षा दूसरा पापियों का वध करना और तीसरा धर्म की स्थापना करना भगवान के भक्तों में तीन गुण विद्वान होने चाहिए उन्होंने अपने से कमजोर व्यक्ति की रक्षा करनी चाहिए धर्म की रक्षा के लिए प्रतिकार करना चाहिए और तीसरा धर्म की स्थापना के लिए प्रयास करना चाहिए नंद घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल की उक्त उद्गार श्रीमद् भागवत कथा के चतुर्थ दिन पंडित रविशंकर प्रसाद शास्त्री ने व्यक्त किया कि उक्त कार्यक्रम में हरिशंकर शर्मा छगन लाल शर्मा सुभाष शर्मा पवन शर्मा प्रदीप शर्मा डॉक्टर संत कुमार शर्मा नितिन तिवारी सुमित पांडे राजकुमार साहू ओम प्रकाश छापरिया सुरेश चंद सा हौसला प्रसाद जोशी सहित सैकड़ों भक्तगण महिलाएं श्रीमद्भागवत गीता का रसपान प्रदान करने हेतु ढोलन बाद का आशीष मिश्रा पिक्चर वेदिका सुमित तिवारी की संगीत एवं ढोलक की थाप पर भक्तगण महिलाओं ने नित्य कर श्री कृष्ण जगमोहन का खूब आनंद लिया