बहराइच आत्मा परमात्मा का मेल है विवाह- पंडित रवि शंकर


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बहराइच नानपारा भारतीय सांस्कृतिक में विवाह संस्कार माना गया है यह शरीर आत्मा का मेल माना गया है भगवान अपनी मानव लीला करते हुए विवाह की भी लीला करते हैं 16108 रानियों से विवाह करने पर भी योगेश्वर कहलाते हैं अर्थात संसार में रहकर भी संस्कार में लिप्त ना होना भी योग है भगवान का प्रथम विवाह रुक्मणी जी के साथ हुआ था रुकमणी जी राजा भीष्म की पुत्री थी उनके भाई रुकमी ने रुकमणी जी का विवाह शिशुपाल नामक राक्षस से करने का प्रण किया था तब रुकमणी जी ने भगवान को पत्र लिखा और भगवान ने रुक्मणी हरण की लीला की भगवान के अन्य विवाह 16100 हुए जो वेदों की रचनाएं थी झुक जइयो तनक यदुवीर लाली मेरी छोटी सी उजागर पंडित रवि शंकर शास्त्री गुरु भाई जी ने व्यक्त किया हरी सदन में श्रीमद्भागवत कथा में छठवें दिन के कार्यक्रम में हरिशंकर शर्मा डॉक्टर संत कुमार शर्मा सुभाष शर्मा सुंदरलाल शर्मा पवन कुमार शर्मा प्रदीप शर्मा सुमित पांडे जुगल किशोर शर्मा नीरज शर्मा सर्वेश शर्मा हौसला प्रसाद जोशी कृष्णा शर्मा अर्चना शर्मा मीना शर्मा ओजस्वी गॉड अभी बात शर्मा राकेश गौड़ राजकुमार साहू नितिन तिवारी सहित सैकड़ों महिलाएं एवं पुरुष शामिल है इस कार्यक्रम में ढोलक वादक आशीष मिश्रा एवं पैड वादक सुमित तिवारी की धुन पर ओसस्वी गौड का नित्य का भी काफी सराहा गया